जम्मू, 20 नवंबर 2025 : जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इंवेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) की एक टीम ने गुरुवार को जम्मू स्थित कश्मीर टाइम्स के कार्यालय पर छापा मारा। फिलहाल छापे की कार्रवाई से जुड़े विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आए हैं।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा—“पिक एंड चूज़ नहीं होना चाहिए”
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मीडिया संस्थानों पर छापेमारी को लेकर जांच एजेंसियों को संतुलित रवैया अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रेस पर किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। लेकिन छापा पिक-एंड-चूज़ के आधार पर नहीं होना चाहिए। अगर किसी ने गलत किया है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ दबाव बनाने के लिए नहीं। प्रेस चौथा स्तंभ है और उसे अपना काम करने की पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए।”
JKPDP यूथ प्रमुख आदित्य गुप्ता का विरोध—“कश्मीर टाइम्स सबसे बोल्ड आवाज़”
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (JKPDP) के युवा प्रमुख आदित्य गुप्ता ने इस छापे की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कश्मीर टाइम्स को केंद्रशासित प्रदेश की “सबसे बोल्ड आवाज़” करार दिया।
गुप्ता ने लिखा, “कश्मीर टाइम्स के संस्थापक वेद भसीन ने J&K में एक निडर और सच्चाई पर आधारित आवाज़ को खड़ा किया। उनकी बेटी अनुराधा भसीन ने भी उसी साहस के साथ इसे आगे बढ़ाया। दशकों तक अख़बार ने मानवाधिकार उल्लंघनों, गुमशुदगियों, शासन की विफलताओं और बड़े राजनीतिक परिवर्तनों जैसी अहम कहानियों को उजागर किया। हर दबाव और हर धमकी के बावजूद कश्मीर टाइम्स कभी नहीं झुका।”
1954 में हुई थी स्थापना, 2023 में बंद हुआ प्रिंट संस्करण
कश्मीर टाइम्स की स्थापना 1954 में वेद भसीन ने की थी। यह जम्मू-कश्मीर का सबसे पुराना अंग्रेज़ी दैनिक माना जाता है। 2023 से यह अख़बार पूरी तरह डिजिटल मल्टीमीडिया प्रारूप में परिवर्तित हो गया, जिससे प्रिंट संस्करण की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म ने ले ली।
इंटरनेट शटडाउन केस में भी रहा महत्वपूर्ण योगदान
अनुराधा भसीन वही पत्रकार हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक Anuradha Bhasin vs Union of India मामले में याचिका दायर की थी। इसी केस में सर्वोच्च न्यायालय ने इंटरनेट बंदी को अस्थायी और सीमित अवधि का उपाय बताते हुए कड़ी शर्तें तय की थीं।
निर्णय में कहा गया था, “यह आदेश 2017 के अस्थायी दूरसंचार सेवा निलंबन नियमों के तहत केवल अस्थायी अवधि के लिए ही लागू किया जा सकता है।”
SIA की छापेमारी को लेकर राजनीतिक और मीडिया संगठनों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। अधिकारी मामले की आगे जांच कर रहे हैं।






