चंडीगढ़, 19 नवंबर 2025:
क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) एक गंभीर श्वसन रोग है, जिसमें फेफड़ों से हवा के प्रवाह में रुकावट पैदा होती है। उपचार योग्य होने के बावजूद, इस रोग को लेकर जागरूकता अभी भी कम है।
जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 19 नवंबर को विश्व COPD दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “Short of Breath, Think COPD” है, जिसका उद्देश्य बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और समय पर इलाज पर जोर देना है।
फोर्टिस अस्पताल मोहाली के डॉ. ज़फ़र अहमद इक़बाल, निदेशक—पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर और स्लीप स्टडीज़, ने COPD के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में जानकारी दी।
क्या है COPD?
डॉ. ज़फ़र ने बताया कि लंबे समय तक हानिकारक धूल, धुएं या गैसों के संपर्क से फेफड़ों की वायु नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे सूजन और संकुचन होता है और सांस लेने में कठिनाई पैदा होती है।
उन्होंने कहा, “COPD के मरीजों को अक्सर अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम रहता है और अचानक सांस की समस्या बढ़ सकती है।”
COPD के मुख्य लक्षण हैं:
* लगातार खांसी और बलगम
* सांस फूलना
* सीने में जकड़न
* घरघराहट
* थकान, मतली
* अचानक वजन कम होना
* पैरों व टखनों में सूजन
डॉ. ज़फ़र के अनुसार, रोग की पहचान क्लीनिकल जांच और स्पाइरोमेट्री टेस्ट के माध्यम से होती है। उन्होंने चेतावनी दी, “COPD के लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें। तुरंत चिकित्सा सलाह आवश्यक है।”
जोखिम कारक
* धूम्रपान (मुख्य कारण)
* बायोमास ईंधन का धुआं
* वायु प्रदूषण
* आनुवंशिक कारण
* फेफड़ों का कमजोर विकास
* उम्र बढ़ना
उपचार में मुख्य रूप से शामिल हैं:
* सक्रिय और निष्क्रिय धूम्रपान से पूरी तरह परहेज
* प्रदूषण से बचाव
* दवाओं का सही उपयोग
डॉ. ज़फ़र ने बताया कि उपचार में ब्रोंकोडायलेटर इनहेलर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दुष्प्रभाव कम होते हैं।
उन्होंने कहा, “हालांकि COPD का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। बिना उपचार के रोग बढ़कर हृदय और श्वसन विफलता तक पहुंच सकता है, जिससे लंबे समय तक ऑक्सीजन और BiPAP सपोर्ट की जरूरत पड़ती है।”
यह जागरूकता दिवस लोगों को चेतावनी देता है कि यदि सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे हल्के में न लें—COPD की जांच कराएं।






