फरीदाबाद, 17 नवंबर, 2025 :
दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद पुलिस ने सोमवार को व्यापक और सख्त जांच शुरू कर दी है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने शहर में किराए पर रहने वाले 2,000 से अधिक कश्मीरी छात्रों और किरायेदारों से पूछताछ की है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ का दौर अभी जारी है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
अल-फला यूनिवर्सिटी पर ‘क्लोज़ वॉच’
फरीदाबाद की अल-फला यूनिवर्सिटी इस मामले में केंद्र बिंदु के रूप में उभरी है। जांच एजेंसियों को यहां से हथियार और भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट मिला था। फरीदाबाद क्राइम ब्रांच की अलग-अलग टीमें कैंपस में जाकर पूछताछ कर चुकी हैं।—
20 लाख का फंड ट्रेल और 26 क्विंटल NPK फर्टिलाइजर
खुफिया एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल से जुड़ा 20 लाख रुपये का फंड ट्रेल तीन डॉक्टरों — उमर, मुझम्मिल और शाहीन — से जुड़ा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार:
* यह धनराशि जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडलर द्वारा हवाला नेटवर्क से भेजी गई।
* करीब 3 लाख रुपये से 26 क्विंटल NPK फर्टिलाइजर खरीदा गया, जिसका उपयोग ब्लास्ट में हुई विस्फोटक सामग्री बनाने के लिए किया गया था।
चार डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द, NIA ने संभाली कमान
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने इस मॉड्यूल से जुड़े चार डॉक्टरों—डॉ. मुजफ्फर अहमद, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद—का मेडिकल रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है।
उधर, NIA ने अब इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है और आपराधिक साजिश की धाराओं में नई FIR दर्ज की है।
‘फिदायीन’ हमलावर की पहचान पक्की
दिल्ली पुलिस की पुष्टि के मुताबिक, ब्लास्ट वाली कार का चालक फिदायीन हमलावर डॉ. उमर उन नबी ही था।
DNA टेस्टिंग में उसका बायोलॉजिकल सैंपल उसकी मां से मैच होने के बाद उसकी पहचान निश्चित हो गई है।
फरीदाबाद और दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, जबकि “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” की फर्जी शैक्षणिक और चिकित्सकीय पहचान के ज़रिए की गई आतंकी साजिशों पर शिकंजा लगातार कस रहा है।






