नई दिल्ली, 13 नवंबर, 2025 : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत डेटा एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें।
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने कोर्ट को बताया कि कई वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों का डेटा या तो अपलोड नहीं हो रहा है या गलत तरीके से अपलोड किया जा रहा है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता “खतरनाक श्रेणी” में पहुंचने के कारण मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
इस बीच, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पराली जलाने की घटनाओं में लापरवाही बरतने पर फतेहाबाद (हरियाणा) के उपायुक्त विवेक भारती को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। डीसी को 17 नवंबर शाम 5 बजे तक लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। जवाब न देने पर CAQM अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आयोग ने बताया कि 1 से 9 नवंबर के बीच फतेहाबाद में पराली जलाने के 59 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 28 मामले सिर्फ 8 और 9 नवंबर को सामने आए। आयोग ने कहा कि “बार-बार निर्देशों के बावजूद पर्याप्त निगरानी और कार्रवाई नहीं की जा रही है।”
हरियाणा में इस सीज़न 206 मामले, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 888 मामले दर्ज हुए थे — इसे आयोग ने “सिर्फ मामूली सुधार” बताया।
CAQM ने अपने 9 मई 2025 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को इस वर्ष कटाई सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने का आदेश दिया गया था। आयोग ने चेताया कि आदेशों की अवहेलना करने वालों को 5 साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।






