भारत और चीन के बीच लिपुलेख के रास्ते व्यापार फिर शुरू करने पर सहमति बनने के एक दिन बाद, नेपाल ने बुधवार को कहा कि यह इलाक़ा उसका अभिन्न हिस्सा है और यह उसके आधिकारिक नक्शे में शामिल है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये दावे ‘अनुचित हैं और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.’
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा, “नेपाल सरकार स्पष्ट करना चाहती है कि महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल के अभिन्न हिस्से हैं. इन्हें नेपाल के नक्शे में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है और यह बात संविधान में भी दर्ज है.”
भारत हमेशा कहता आया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र में आते हैं. लेकिन नेपाल में ये एक बेहद संवदेनशील मुद्दा है. साल 2020 में इसी मुद्दे पर नेपाल में हिंसक प्रदर्शन हुए थे.
मंगलवार को नई दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस व्यापक बातचीत के बाद एक संयुक्त दस्तावेज़ जारी किया गया.
उस दस्तावेज़ में कहा गया कि दोनों देशों ने सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है. यह व्यापार तीन निर्धारित मार्गों – लिपुलेख दर्रा, शिपकी ला दर्रा और नाथु ला दर्रा से होगा.
भारत और चीन के बीच लिपुलेख से सीमा व्यापार फिर शुरू करने की घोषणा पर नेपाल के मीडिया ने सवाल उठाए. इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया.
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा, “सबको पता है कि नेपाल सरकार लगातार भारत सरकार से कह रही है कि इस क्षेत्र में सड़क निर्माण या विस्तार न किया जाए और न ही सीमा व्यापार जैसी कोई गतिविधि चलाई जाए.”
उन्होंने आगे कहा, “यह तथ्य भी स्पष्ट है कि नेपाल सरकार ने चीन सरकार को पहले ही सूचित कर दिया है कि यह इलाक़ा नेपाल का हिस्सा है.”
लोक बहादुर छेत्री ने कहा, “नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के रिश्तों की भावना के अनुरूप, ऐतिहासिक समझौते, तथ्यों, नक्शे और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कूटनीतिक माध्यमों से किया जाएगा.”
साल 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में भारत और चीन के बीच हुई झड़प के बाद सीमा व्यापार बंद हो गया था. लेकिन पिछले साल दिसंबर में दोनों देशों ने इसी सीमा मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर सहमति जताई थी.
अब भारत ने बताया है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत में लिपुलेख सहित तीन पारंपरिक सीमा चौकियों को फिर से खोलने पर सहमति बनी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने मंगलवार को कहा, “हमने सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर व्यापार को आसान बनाने पर सहमति जताई है.”
उन्होंने बताया कि इनमें उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा, हिमाचल प्रदेश का शिपकी ला दर्रा और सिक्किम का नाथु ला दर्रा शामिल है.
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुए समझौते में लिपुलेख दर्रे के व्यावसायिक इस्तेमाल का ज़िक्र है.
इस पर चीनी विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर पुष्टि की कि तीन व्यापारिक रास्ते खोलने पर सहमति बनी है.






